लोकपाल चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भेजा नोटिस

 चयन प्रक्रिया में अनदेखी का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण

बीकानेर, 13 जुलाई।  बीकानेर में लोकपाल पद हेतु जारी चयन प्रक्रिया न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है। चयन प्रक्रिया में कथित पारदर्शिता की कमी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर ने राज्य सरकार सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति रेखा बोराणा की एकलपीठ ने अनिल कुमार पुरोहित द्वारा दायर याचिका पर प्राथमिक सुनवाई करते हुए पारित किया।


याचिका में कहा गया है कि बीकानेर में लोकपाल पद के लिए पाँच अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार में भाग लिया, परंतु प्रक्रिया के अगले चरण में केवल दो अभ्यर्थियों को ही शामिल किया गया और उन्हीं पर आपत्तियाँ आमंत्रित की गईं। शेष तीन अभ्यर्थियों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, बिना किसी कारण या सूचना के। याचिकाकर्ता अनिल कुमार पुरोहित की ओर से अधिवक्ताओं मधुसूदन पुरोहित एवं अमित पुरोहित ने न्यायालय में पक्ष रखा।

प्रारंभिक तथ्यों के अनुसार, याचिकाकर्ता ने दिनांक 5 मई 2025 को विस्तृत आपत्तियाँ प्रस्तुत की थीं। इसके बावजूद 19 जून 2025 को अंतिम चयन सूची जारी कर दी गई, जिसमें उक्त आपत्तियों का कोई उल्लेख नहीं किया गया। इसे न्यायालय के समक्ष गंभीर अनदेखी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के डिप्टी गवर्नमेंट काउंसल को याचिका की प्रति सौंपे जाने और सभी पक्षों को एक सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह बताया जाए कि याचिकाकर्ता की आपत्तियों पर कोई निर्णय लिया गया या नहीं।

मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2025 को निर्धारित की गई है। अदालत की यह कार्यवाही लोकपाल जैसी संवैधानिक व्यवस्था की निष्पक्षता और वैधानिक प्रक्रिया पर एक अहम परीक्षण के रूप में देखी जा रही है।


Question on transparency of Lokpal selection process, High Court sends notice to state government