वर्तमान में भू-सांस्कृतिक इतिहास लेखन की प्रासंगिकता अनिवार्य : प्रोफेसर हिमांशु चतुर्वेदी
इतिहास संकलन समिति द्वारा इतिहासकारों का सम्मान
बीकानेर, 22 जुलाई . बीकानेर के राजू वास गेस्ट हाउस में इतिहास संकलन समिति बीकानेर जिला एवं महानगर इकाई द्वारा बीकानेर पधारे प्रोफेसर हिमांशु चतुर्वेदी एवं प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता प्रोफेसर वसंत शिंदे का साफा एवं अपर्णा भेंट कर सम्मान किया गया।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित द्वारा की गई इस अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर से पधारे प्रोफेसर हिमांशु चतुर्वेदी ने अपने उद्बोधन में कहा की वर्तमान इतिहास अब नई करवट ले रहा है विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और एनसीईआरटी के द्वारा इतिहास में व्यापक मौलिक परिवर्तन किए जा रहे हैं जिनका उद्देश्य युवा पीढ़ी को भौगोलिक और सांस्कृतिक परिवेश से जोड़ना है इसके साथ ही भारतीय इतिहास को भारतीय दृष्टि से लेखन के लिए भू-सांस्कृतिक परिवेश से जोड़ने की नितांत आवश्यकता है। कार्यक्रम के अंतर्गत पुणे महाराष्ट्र से पधारे प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता प्रोफेसर वसंत शिंदे ने कहा कि राजस्थान की भूमि अपने भीतर प्राचीनतम सभ्यताओं को समाहित किए हुए हैं जहां आज भी उत्खनन की माहिती आवश्यकता है विश्वविद्यालय एवं इतिहास संकलन समिति के माध्यम से इस क्षेत्र में नवीनतम खोज की आवश्यकता है कार्यक्रम के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने यह आश्वासन दिया की एनसीईआरटी एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय वांछित सहयोग करेगा। कार्यक्रम के अंतर्गत जोधपुर प्रांत संपर्क प्रमुख डॉ. अशोक शर्मा ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। अभिनंदन समारोह का संयोजन एवं अतिथि परिचय डॉ.राजशेखर पुरोहित के द्वारा दिया गया।
: इनकी रही विशेष उपस्थित : आज के इतिहासकारों के सम्मान कार्यक्रम के अंतर्गत महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय समाज विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता (डीन) डॉ चंद्रशेखर कच्छावा डॉ.सुनीता बिश्नोई डॉ. सुनीता स्वामी श्री अमित जी शिव शंकर चौधरी श्री भगवान सारण आनंद कुमार साध डॉ कमल चरण श्री रामकुमार सुधीर छिपा पवन रांकावत एवं श्री सीताराम की उपस्थिति सक्रिय रूप से रही।
